डॉ. कुमार विश्वास की गज़ल झोंका हूँ हवाओं का... मैं तो झोंका हूँ हवाओं का उड़ा ले जाऊंगा, जागते रहना तुझे तुझसे चुरा ले जाऊंगा। हो के कदमों पे निछावर फूल ने बुत से कहा, ख़ाक में मिलकर भी मैं खुशबू बचा ले जाऊंगा। कौन सी शय मुझको पहुँचाएगी तेरे शहर, ये पता तो तब चलेगा जब पता ले जाऊंगा। कोशिशें मुझको मिटाने की भले हो कामयाब, मिटते मिटते भी मैं मिटने का मजा ले जाऊंगा। शोहरतें जिनकी वजह से दोस्त दुश्मन हो गए, सब यहीं रह जाएँगी मैं साथ क्या ले जाऊंगा।
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